वाराणसी। कमिश्नरेट पुलिस में 'अर्दली रूम' की समीक्षा क्या हुई, महकमे में मानो भूचाल आ गया। पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल ने विवेचनाओं ...
वाराणसी। कमिश्नरेट पुलिस में 'अर्दली रूम' की समीक्षा क्या हुई, महकमे में मानो भूचाल आ गया। पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल ने विवेचनाओं में हीला-हवाली और फाइलों को लटकाए रखने के मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए एक साथ 13 पुलिसकर्मियों पर गाज गिराई है। लापरवाही की हद पार करने वाले कैंट, शिवपुर और लालपुर-पांडेयपुर थाने के एक इंस्पेक्टर और 12 सब-इंस्पेक्टरों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
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| Purvanchal Samachar |
60 दिन का 'डेडलाइन' पड़ा भारी, अर्दली रूम में खुली पोल
गुरुवार को जब पुलिस कमिश्नर ने कैंट, शिवपुर और लालपुर-पांडेयपुर थानों की फाइलों का 'पोस्टमार्टम' शुरू किया, तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। नियमानुसार जिन विवेचनाओं का निस्तारण समय सीमा के भीतर होना चाहिए था, उन्हें ये विवेचक 60-60 दिनों से दबाकर बैठे थे। साक्ष्य संकलन और वांछित अपराधियों की गिरफ्तारी के नाम पर 'शून्य' रिपोर्ट देखकर सीपी ने ऑन-द-स्पॉट निलंबन की कार्रवाई कर दी।
कैंट से शिवपुर तक खलबली, विभागीय जांच की तलवार लटकी
निलंबित होने वालों में कैंट थाने के इंस्पेक्टर संतोष पासवान समेत शिवपुर और लालपुर-पांडेयपुर के कुल 12 दरोगा शामिल हैं। सीपी मोहित अग्रवाल ने साफ कर दिया है कि केवल निलंबन ही काफी नहीं है, इन सभी के खिलाफ विभागीय जांच की संस्तुति भी कर दी गई है। अब यह खंगाला जाएगा कि विवेचनाओं को आखिर किस 'खास वजह' से लटकाया गया था और इनका पिछला रिकॉर्ड कैसा रहा है।

